नवांश (D9) कुंडली क्या है?
संक्षिप्त उत्तर
नवांश या D9 कुंडली एक वर्ग कुंडली है जो हर राशि को 3°20′ के नौ भागों में बाँटकर बनती है। मुख्य राशि कुंडली के बाद यह वैदिक ज्योतिष की सबसे ज़रूरी कुंडली है, ख़ास तौर पर विवाह और साझेदारी के लिए और हर ग्रह का असली बल परखने के लिए।
D9 कैसे बनती है
हर 30° की राशि 3°20′ के नौ नवांशों में बँटी है। किसी ग्रह की नवांश स्थिति इस पर निर्भर करती है कि वह इनमें से किस हिस्से में पड़ता है। नतीजा एक पूरी कुंडली है, जिसका अपना लग्न और भाव होते हैं, और जो उसी उत्तर या दक्षिण भारतीय शैली में बनती है।
इसका इस्तेमाल किसलिए होता है
परंपरा में नवांश विवाह और जीवनसाथी का स्वभाव, व्यक्ति का धर्म, और समय के साथ मुख्य कुंडली का फल दिखाता है। जो ग्रह राशि कुंडली में कमज़ोर पर नवांश में बली हो, उसे अक्सर उम्र के साथ बेहतर होता माना जाता है।
जब कोई ग्रह D1 और D9 दोनों में एक ही राशि में हो, तो उसे वर्गोत्तम कहते हैं, जो बल का संकेत माना जाता है।
आम सवाल
- क्या नवांश के लिए सही जन्म समय ज़रूरी है?
- हाँ। नवांश लग्न लगभग हर 13 मिनट में बदलता है, इसलिए यह मुख्य कुंडली से ज़्यादा जन्म समय पर निर्भर है।
- और कौन-सी वर्ग कुंडलियाँ होती हैं?
- शास्त्रों में सोलह वर्ग बताए गए हैं। आम तौर पर देखी जाने वाली हैं करियर के लिए D10 (दशमांश), संतान के लिए D7 और माता-पिता के लिए D12।
स्रोत और आगे पढ़ें
ज्योतिष चिंतन की एक पारंपरिक पद्धति है। अलग-अलग परंपराओं में व्याख्या अलग होती है; यह गाइड आम प्रचलन बताता है।